*क्रांतिवीर सुखदेव पातर ह हल्बा हल्बी जी की 63 पुण्यतिथि के पावन अवसर पर ग्राम भेलवा पानी (लोहतर) विकासखंड दुर्गूकोदल में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी जी सम्मिलित हुई जिसका आयोजन अखिल भारतीय हल्बा हल्बी समाज ब्लॉक द्वारा किया गया*। दुर्गूकोदल 9 जनवरी 2025 आज भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र ब्लॉक दुर्गुकोंदल के ग्राम भेलवापानी(लोहत्तर)मे क्रांतिकारी सुखदेव पातर हल्बा जी की 63वीं पुण्यतिथि में क्षेत्रीय विधायक श्रीमती सावित्री मण्डावी बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुई।अपने सम्बोधन में विधायक मण्डावी ने कहा कि क्रांतिवीर सुकदेव पातर हल्बा जी के 63 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। दुर्गूकोंदल जैसे सुदुर अंचल से स्वतंत्रता के बिगुल बजाने वाले पातर हल्बा जी ,आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। सुकदेव पातर हल्बा जी का स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे गांधीवादी विचारधारा के मानने वाले थे और इसी कारण उन्होंने गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। सुकदेव पातर हल्बा जी ने, इंदरू केंवट व कंगलु कुम्हार जी के साथ मिलकर लोगों में जागरूकता फैलाई कि किस प्रकार से हमें अंग्रेजों का विरोध करना है। ताकि गुलामी की जंजीरों से भारत को आजाद किया जा सके। मैं राऊरवाही के उस पावन धरती को भी मैं नमन करती हूं जहां सुकदेव पातर हल्बा जैसे क्रांतिवीर का जन्म हुआ और जहां आज आप और हम सब भेलवापानी में पातर जी का पुण्यतिथि मना रहे हैं ,वह इनकी कर्मभूमि है। जब 1920 में कंडेल सत्याग्रह में गांधी जी कंडेल धमतरी आये थे। तब उस सत्याग्रह में शामिल होने के लिए पातर जी, कंगलु कुम्हार जी और इंदरू केंवट जी ये तीनों यहां से पैदल ही चले गए । जहां पर गांधी जी से इनकी मुलाकात हुई थी। पुराने जमाने में लगान भी किसी मुसीबत से कम नही था।जो लगान नही भर पाते थे। उनकी जमीन छीन ली जाती थी। और ऐसे ही एक घटना 1944 - 45 में हुई। जब कांकेर रियासत के दीवान टी . महापात्र के द्वारा लगान में वृद्धि कर दी गई तो इसके विरोध में ये तीनों कुद पड़े कि आप बढ़ी हुई दर को वापस लें। नही तो हम लगान नही भरेंगे । और किसी ने लगान नही भरी तो इनके ऊपर राजद्रोह का मुकदमा लगाया गया। तब भी ये झुके नही बल्कि आंदोलन और तेज हो गया। राजस्व विरोधी इस आंदोलन की भयावह को देखते हुए कांकेर रियासत के प्रमुख महाराज भानुप्रतापदेव ने राजद्रोह का मुकदमा वापस ले लिया। क्रांतिवीर सुकदेव पातर हल्बा जी योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता। बल्कि उनके बताएं मार्ग पर चलें और आने वाली पीढ़ी को पातर जी के कहानी को जरूर सुनाएं। मैं अखिल भारतीय हल्बा हल्बी आदिवासी समाज का आभारी हूं कि मुझे आप सबने इस महान क्रांतिकारी के पुण्यतिथि में सम्मिलित होने का अवसर दिया और पातर जी को करीब से जानने का मौका मिला। पातर हल्बा जी के साथ ही मैं गैंद सिंह जी, कंगलु कुम्हार जी, इंदरू केंवट जी, दारसू गोंड़ जी, रंजन हल्बा जी , रोहिदास गोंड़ जी, ढोंगिया ठाकुर जी और ठंगू पातर जी को भी मैं इस मंच से सादर नमन करती हूं। जिन्होंने हमें आजादी दिलाने के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी।इस अवसर पर बीरेंद्र चनाप राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अ.भा.हल्बा,हल्बी आदिवासी समाज,मंगतू राम पावर भूतपूर्व विधायक अंतागढ़,लतेल राम नाईक,देवेन्द्र कोठेवरि, शिवकुमार चिराम,सुनील बबला पाढ़ी अध्यक्ष नगर पंचायत भानुप्रतापपुर,मनीष टेम्पा योगी पार्षद भानुप्रतापपुर,ढालसिंह पात्र,अमिता उइके सदस्य जिला पंचायत कांकेर, सियाराम जैन,राधेश्याम चक्रधारी,शेरसिंह आँचला गोंडी धर्माचार्य,भागीरथी निषाद ,शिवकुमार पात्र, सियाराम तुलावी,सेवालाल चिराम,राम बघेल,जी.आर चुरेन्द्र भूतपूर्व आयुक्त सरगुजा,अहिल्या बाई पात्र सरपंच परभेली,बसंती भालेश्वर सरपंच लोहत्तर,भगवती गजेन्द्र वरिष्ठ कॉंग्रेस नेता, मुकेश्वरी नरेटी सदस्य जनपद पंचायत दुर्गुकोंदल,रैनसिंह कोठारी,सदाराम ठाकुर,कंवल सिंह दिवान,परमेश्वर दिवान,लीला प्रसाद कुलदीप, कन्हैया पात्र,जगत दुग्गा,देवलाल नरेटी,महत्तम दुग्गा,कुबेर दर्रो,गोपाल राठी,नीरज कोसमा व समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहें।
सुखदेव पातर जी का 63 वाँ पुण्यतिथि मनाया गया // Sukhdev Patar ji's 63rd death anniversary was celebrated
by♂️Aαɾყαɳ Cԋιɾαɱ✅
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